गांधी जयंती के साथ स्थापना दिवस मनाया गया।। 

गांधी जयंती के साथ स्थापना दिवस मनाया गया।। 

गांधी जयंती के साथ स्थापना दिवस मनाया गया।।  2

Apna Lakahya News


अमरपाटन नगर की एक मात्र साहित्यिक,सांस्कृतिक,सामाजिक संस्था,साहित्य प्रकाश द्वारा अभय आश्रम अमरपाटन में गांधी जयंती के साथ साहित्य प्रकाश का स्थापना दिवस मनाया गया। जिस के मुख्य अतिथि श्री दिनेश प्रसाद शुक्ल सांसद प्रतिनिधि एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष पंडित रघुनाथ प्रसाद पाठक रहे प्रारंभ में सरस्वती वंदना के साथ संस्था के अध्यक्ष सुरेश शुक्ल ने सभी का स्वागत करते हुए सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और बताया यह संस्था आज 39 वर्ष की हो गई है। संस्था ने हिमालय से निकलने वाली गंगा के समान अनेक कठिनाइयों का सामना किया और संगम तट पर अपना सुंदर रूप प्रदर्शित किया। संस्था द्वारा आठ काव्य संकलन का प्रकाशन हो चुका है। इसके बाद एक कविता प्रस्तुत की- 
आपस की तकरार रार बन गई।। सदियों के रिश्तो में धार बन गई, सिद्धि व प्रसिद्धि मिलती नहीं वेश में। 


कर्म से फिसल रहे चल रहे शेष में, 
महंत बनकर जिए तो क्या जिए। संत बन कर जियो तो बात है।।
नरेंद्र सोनी ने कहा- दीया है कर दिया दीया का उजाला दिया कविता प्रस्तुत की महेश रजक ने कहा- आज कैसा मंजर दिखता है गांधी के देश में विचार व्यक्त किया इंद्रपाल द्विवेदी ने कहा- नवयुग में बापू जन्म लिए जहां सत्य अहिंसा धर्म कराह रहा जिसका व्रत धर्म ईमान रहा इंसान रहा कराह रहा कविता प्रस्तुत की। वीरेंद्र सोनी ने कहा- अरी लेखनी क्यों करती है, सत्ताधिशो का यश गान। जो शासन का लहू  चूसते और करें निशदिन अपमान कविता प्रस्तुत की राजेंद्र विश्वकर्मा ने कहा- महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे भारत की आजादी के वीर सपूत ने शासन किया। सुमनोत्तम  द्विवेदी जी ने कहा- ग्राम स्वराज गांधीजी का सपना था जो वर्तमान समय में जगह जगह दिखाई देता है।

रामराज्य की कल्पना गांधी ने की थी गांधी का दर्शन बहुत ऊंचा है। जिसे समझ पाना कठिन है डॉक्टर बृजेश द्विवेदी ने कहा- महात्मा गांधी ने राजनीतिक प्रयोग तथा आध्यात्मिक प्रयोग कर सत्य का प्रयोग लिखा है गांधीजी की हिंसा तथा अधर्म में भेद नहीं करती हिंसा के संयम पर अहिंसा होती है राजेंद्र सिंह ने कहा- गांधी जी हमारी चाह हैं आज पूजा की थाली सजाए बैठे हैं यह भारत की वंदना है गांधी जी ने हमें तीन बंदर के माध्यम से जनमानस को समझाने का पूरा प्रयास किया था मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रसाद शुक्ल ने कहा- गांधीजी के तीन बंदर की शिक्षा बहुत ही जीवन उपयोगी है और शास्त्री जी की सादगी जीवन में वंदनीय है गांधीजी के विचार पर चलने वाले हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे लो देश का नाम विश्व में बनाए रखते हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित रघुनाथ प्रसाद पाठक ने कहा- गांधीजी के दिए गए विचारों का चिंतन होते रहना चाहिए तथा उनके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सभी को प्रयत्न रत रहना चाहिए। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के सचिव राजेंद्र सिंह ने किया तथा संस्था की संपूर्ण जानकारी कोषाध्यक्ष वीरेंद्र सोनी ने प्रस्तुत किया और अंत में संस्था के अध्यक्ष सुरेश शुक्ल ने सभी का आभार व्यक्त किया।