आम भेज कर मिली पाकिस्तान को खास बेइज्जती

आम भेज कर मिली पाकिस्तान को खास बेइज्जती

आम भेज कर मिली पाकिस्तान को खास बेइज्जती 0

apnalakshyanews

अपनी हरकतों से दुनिया भर में आए दिन अपनी बेइज्जती कराता ही रहता है, किंतु उसे इसका कोई मलाल भी नहीं है। कभी इमरान खान चीन में जाकर पाकिस्तान को एक भिखारी के रूप में पेश करते हैं, तो कभी सऊदी जाकर चावलों की बोरियां प्लेन से ले आते हैं। इस प्रकार की बेइज्जती पाकिस्तान के लिए कोई नई बात नहीं है‌। अब पाकिस्तान ने एक नया कांड किया है, जिससे साबित होता है कि जो सुधर जाए वो पाकिस्तान नहीं।


       पाकिस्तान दुनिया से अपने रिश्ते सुधारने की हर संभव कोशिश में लगा रहता है और कूटनीतिक मोर्चे पर दुनिया के साथ अलग-अलग पैंतरे आजमाता रहता है। इसी कोशिश के तहत उसने कई देशों को आम भेजे थे, इमरान खान को यह उम्मीद थी कि पाकिस्तानी आम का मीठा स्वाद अमेरिका जैसे देशों में उनके प्रति पैदा हुई कड़वाहट को दूर कर देगा और उनके संबंधों में मिठास घोल देगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पाकिस्तान ने अपनी इस आम वाली डिप्लोमेसी को 32 देशों पर आजमाया, लेकिन अमेरिका सहित कई देशों ने पाकिस्तान के इस तोहफे को लेने से साफ इनकार कर दिया। खास बात तो यह है कि जिस चीन को पाकिस्तान अपना सगा व खास मानता है, उस चीन ने भी पाकिस्तान की मैंगो डिप्लोमेसी को ठुकरा दिया, यानी इमरान के आम भी अब जीरो दाम के हो गए हैं।


        दहशतगर्दी को पालने-पोसने वाला पाकिस्तान अब एक अजीबो-गरीब दौर से गुजर रहा है। आर्थिक तंगी ने पहले ही पाकिस्तान की कमर तोड़ रखी है, अब चीन और अमेरिका जैसे देशों ने भी पाकिस्तान की मैंगो डिप्लोमेसी को जोर का झटका दे दिया। इन देशों के अलावा कुछ और देशों ने भी पाकिस्तान की तरफ से भेजे जाने वाले चौसा आम की पेटियों को लौटा दिया है, इस वजह से अब पाकिस्तान की वैश्विक बेइज्जती की चर्चाएं जोर-शोर से हो रही हैं। आम के आम गुठलियों के दाम वाले फार्मूले पर काम करने वाले पाकिस्तान को इस बेइज्जती से ऐसा झटका लगा है कि अब पाकिस्तान के हुक्मरानों को चेहरा छिपाते नहीं बन रहा।


     आम का सीजन बहुत ही खास सीजन होता है, इस सीजन में आम की मिठास जेहन में बस जाती है। किस्म कोई भी हो, देश कोई भी हो, आम के स्वाद की वैरायटी और सुगंध किसी को भी लुभा सकती है। पाकिस्तान में चौसा आम की न सिर्फ अच्छी पैदावार होती है, बल्कि इन आमों को पाकिस्तान के पसंदीदा आमों में शुमार किया जाता है, यही वजह है कि इस बार अमेरिका और चीन सहित 32 से ज्यादा देशों को ये आम तोहफे में भेजे गए थे, लेकिन अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अपने कोरोना वायरस क्वारंटीन नियमों का हवाला देते हुए इस तोहफे को कबूल करने से इंकार कर दिया है। भले ही अमेरिका और चीन समेत दूसरे देशों की तरफ से कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देकर आमों को वापस किया गया हो, लेकिन पाकिस्तान की दुनिया भर में बेइज्जती तो हो ही गई।

पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मनोवैज्ञानिक चोट चीन से लगी है क्योंकि वह चीन को अपना सबसे बड़ा हिमायती मानता रहा है और वक्त-वक्त पर चीन पाकिस्तान के खाली कटोरे को भरता भी रहा है, इतना ही नहीं पाकिस्तान की मैंगो डिप्लोमेसी से चीन का खासा जुड़ाव भी रहा है। 1960 के दशक में जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री मियां अरशद हुसैन ने माओत्से तुंग को आम उपहार में दिए थे, तब दोनों देशों ने आम के फलों के टोकरों का  आदान-प्रदान करके अपने संबंधों को मजबूत किया था, लेकिन इस बार चीन ने यह तोहफा कबूल करने से इंकार कर दिया है। इसलिए अब दोनों देशों के बीच इस आम वाली दोस्ती पर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान का मकसद था कि ये आम भेजकर वह इन देशों से संबंध सुधार लेगा और अपनी लाचारी दिखा कर कुछ मदद पाने में सफल हो जाएगा, पर वह अपनी इस चाल में सफल नहीं हो पाया।